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वाल्मीकि रामायण 16.24

स तु वृक्षेण निर्भग्नः साल ताडन विह्वलः ।
गुरु भार भर आक्रान्ता नौः ससार्था इव सागरे ॥४-१६-२४॥

पूरा अध्याय