ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 1616.26वाल्मीकि रामायण 16.26परस्परम् अमित्र घ्नौ च्छिद्र अन्वेषण तत्परौ । ततो अवर्धत वाली तु बल वीर्य समन्वितः ॥४-१६-२६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय