Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 1.65

चक्रवाक युता नित्यम् चित्र प्रस्थ वनान्तरा ।
मातंग मृग यूथैः च शोभते सलिल अर्थिभिः ॥४-१-६५॥

पूरा अध्याय