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वाल्मीकि रामायण 1.66

पवन आहत वेगाभिः ऊर्मिभिः विमले अंभसि ।
पन्कजानि विराजन्ते ताड्यमानानि लक्ष्मण ॥४-१-६६॥

पूरा अध्याय