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वाल्मीकि रामायण 1.64

जले तरुण सूर्याभैः षट्पद आहत केसरैः ।
पन्कजैः शोभते पम्पा समन्तात् अभिसंवृता ॥४-१-६४॥

पूरा अध्याय