ग्रंथवाल्मीकि रामायणकिष्किन्धाकाण्डसर्ग 11.63वाल्मीकि रामायण 1.63एषा प्रसन्न सलिला पद्म नील उत्पलायुता । हंस कारण्डव आकीर्णा पम्पा सौगन्धिका युता ॥४-१-६३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय