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वाल्मीकि रामायण 1.62

इमानि शुभ गन्धीनि पश्य लक्ष्मण सर्वशः ।
नलिनानि प्रकाशन्ते जले तरुण सूर्य वत् ॥४-१-६२॥

पूरा अध्याय