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वाल्मीकि रामायण 1.105

श्यमा पद्म पलाशाक्षी प्रिया विरहिता मया ।
कथम् धरयति प्राणान् विवशा जनकात्मजा ॥४-१-१०५॥

पूरा अध्याय