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वाल्मीकि रामायण 1.104

पद्म सौगन्धिक वहम् शिवम् शोक विनाशनम् ।
धन्या लक्ष्मण सेवन्ते पम्पाया वन मरुतम् ॥४-१-१०४॥

पूरा अध्याय