ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 6060.33वाल्मीकि रामायण 60.33नूनम् विक्षिप्यमाणौ तौ बाहू पल्लव कोमलौ । भक्षितौ वेपमान अग्रौ स हस्त आभरण अंगदौ ॥३-६०-३३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय