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वाल्मीकि रामायण 60.32

सा हि चंपक वर्ण आभा ग्रीवा ग्रैवेयक उचिता ।
कोमला विलपन्त्याः तु कान्ताया भक्षिता शुभा ॥३-६०-३२॥

पूरा अध्याय