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वाल्मीकि रामायण 60.31

नूनम् तत् शुभ दंत ओष्ठम् सुनासम् शुभ कुण्डलम् ।
पूर्ण चंद्र निभम् ग्रस्तम् मुखम् निष्प्रभताम् गतम् ॥३-६०-३१॥

पूरा अध्याय