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वाल्मीकि रामायण 60.34

मया विरहिता बाला रक्षसाम् भक्षणाय वै ।
सार्थेन इव परित्यक्ता भक्षिता बहु बांधवा ॥३-६०-३४॥

पूरा अध्याय