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वाल्मीकि रामायण 56.13

न ते पापम् इदम् कर्म सुख उदर्कम् भविष्यति ।
या अहम् नीता विना भावम् पति पार्श्वात् त्वया वनात् ॥३-५६-१३॥

पूरा अध्याय