ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5656.14वाल्मीकि रामायण 56.14स हि देवर - दैवत - संयुक्तो मम भर्ता महाद्युतिः । निर्भयो वीर्यम् आश्रित्य शून्ये वसति दण्डके ॥३-५६-१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय