ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4747.33वाल्मीकि रामायण 47.33महा गिरिम् इव अकंप्यम् महेन्द्र सदृशम् पतिम् । महा उदधिम् इव अक्षोभ्यम् अहम् रामम् अनुव्रता ॥३-४७-३३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय