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वाल्मीकि रामायण 42.16

मणिप्रवर शृंगाग्रः सित असित मुखाकृतिः ।
रक्तपद्मोत्पल मुख इन्द्रनीलोत्पल श्रवाः ॥३-४२-१६॥

पूरा अध्याय