ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3535.8वाल्मीकि रामायण 35.8स श्वेत वाल व्यजनः श्वेतः छत्रो दशाननः । स्निग्ध वैदूर्य संकाश तप्त कान्चन भूषणः ॥३-३५-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय