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वाल्मीकि रामायण 35.9

दशग्रीवो विम्शति भुजो दर्शनीय परिच्छदः ।
त्रिदश अरिः मुनीन्द्र घ्नो दश शीर्ष इव अद्रि राट् ॥३-३५-९॥

पूरा अध्याय