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वाल्मीकि रामायण 32.22

राक्षसी भ्रातरम् क्रूरम् सा ददर्श महाबलम् ।
तम् दिव्य वस्त्र आभरणम् दिव्य माल्य उपशोभितम् ॥३-३२-२२॥

पूरा अध्याय