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वाल्मीकि रामायण 32.23

आसने सूपविष्टम् तम् काले कालम् इव उद्यतम् ।
राक्षसेन्द्रम् महाभागम् पौलस्त्य कुल नन्दनम् ॥३-३२-२३॥

पूरा अध्याय