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वाल्मीकि रामायण 23.8

बभूव तिमिरम् घोरम् उद्धतम् रोम हर्षणम् ।
दिशो वा प्रदिशो वा अपि सुव्यक्तम् न चकाशिरे ॥३-२३-८॥

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