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वाल्मीकि रामायण 23.7

प्रभिन्नगजसंकाशतोयशोणितधारिणः ।
यद्वा -प्रभिन्न गज संकाश तोय शोणित धारिणः ।आकाशम् तत् अनाकाशम् चक्रुः भीम अंबु वाहकाः ॥३-२३-७॥

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