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वाल्मीकि रामायण 23.9

क्षतज आर्द्र सवर्णाभा संध्या कालम् विना बभौ ।
खरम् च अभिमुखम् नेदुः तदा घोरा मृगाः खगाः ॥३-२३-९॥

पूरा अध्याय