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वाल्मीकि रामायण 21.6

इति एवम् उक्ता दुर्धर्षा खरेण परिसान्त्विता ।
विमृज्य नयने स अस्रे खरम् भ्रातरम् अब्रवीत् ॥३-२१-६॥

पूरा अध्याय