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वाल्मीकि रामायण 21.5

अनाथ वत् विलपसि किम् नु नाथे मयि स्थिते ।
उत्तिष्ठोत्तिष्ठ मा मैवम् वैक्लव्यम् त्यज्यताम् इति ॥३-२१-५॥

पूरा अध्याय