ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2121.7वाल्मीकि रामायण 21.7अस्मि इदानीम् अहम् प्रप्ता हत श्रवण नासिका । शोणित ओघ परिक्लिन्ना त्वया च परिसमन्विता ॥३-२१-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय