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वाल्मीकि रामायण 20.23

उपगम्य खरम् सा तु किंचित् संशुष्क शोणिता ।
पपात पुनः एव आर्ता सनिर्यासा इव वल्लरी ॥३-२०-२३॥

पूरा अध्याय