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वाल्मीकि रामायण 20.22

निपेतुः शोणित स्नाता विकृता विगत असवः ।
तान् भूमौ पतितान् दृष्ट्वा राक्षसी क्रोध मूर्च्छिता ॥३-२०-२२॥

पूरा अध्याय