ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1717.9वाल्मीकि रामायण 17.9बभूव इन्द्रोपमम् दृष्ट्वा राक्षसी काम मोहिता । सुमुखम् दुर्मुखी रामम् वृत्त मध्यम् महोदरी ॥३-१७-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय