ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1717.8वाल्मीकि रामायण 17.8सुकुमारम् महा सत्त्वम् पार्थिव व्यंजन अन्वितम् । रामम् इन्दीवर श्यामम् कन्दर्प सदृश प्रभम् ॥३-१७-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय