ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1717.11वाल्मीकि रामायण 17.11तरुणम् दारुणा वृद्धा दक्षिणम् वाम भाषिणी । न्याय वृत्तम् सुदुर्वृत्ता प्रियम् अप्रिय दर्शना ॥३-१७-११॥पिछलाअगलापूरा अध्याय