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वाल्मीकि रामायण 16.11

मृदु सूर्याः सनीहाराः पटु शीताः समारुताः ।
शून्य अरण्या हिम ध्वस्ता दिवसा भान्ति साम्प्रतम् ॥३-१६-११॥

पूरा अध्याय