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वाल्मीकि रामायण 72.19

एतत् सुरुचिरम् भाति पितुर् मे शयनम् पुरा ।
शशिनेवामलम् रात्रौ गगनम् तोयदात्यये ॥२-७२-१९॥

पूरा अध्याय