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वाल्मीकि रामायण 12.81

अज्ञानादुपसम्पन्ना रज्जुरुद्बम्धिनी यथा ।
रममाणस्त्वया सार्धम् मृत्युम् त्वा नाभिलक्षये ॥२-१२-८१॥

पूरा अध्याय