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वाल्मीकि रामायण 12.80

दुःखमेवम्विधम् प्राप्तम् पुराकृतमिवाशुभम् ।
चिरम् खलु मया पापे त्वम् पापेनाभिरक्षिता ॥२-१२-८०॥

पूरा अध्याय