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वाल्मीकि रामायण 12.82

बालो रहसि हस्तेन कृष्णसर्पमिवास्पृशम् ।
मया ह्यपितृकः पुत्रःस महात्मा दुरात्मना ॥२-१२-८२॥

पूरा अध्याय