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वाल्मीकि रामायण 24.13

अविप्रहतम् ऐक्ष्वाकः पप्रच्छ मुनि पुंगवम् ।
अहो वनम् इदम् दुर्गम् झिल्लिका गण संयुतम् ॥१-२४-१३॥

पूरा अध्याय