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ऋग्वेद 54.5

यदि॑न्द्र॒ राधो॒ अस्ति॑ ते॒ माघो॑नं मघवत्तम । तेन॑ नो बोधि सध॒माद्यो॑ वृ॒धे भगो॑ दा॒नाय॑ वृत्रहन् ॥५॥

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