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ऋग्वेद 54.4

पू॒षा विष्णु॒र्हव॑नं मे॒ सर॑स्व॒त्यव॑न्तु स॒प्त सिन्ध॑वः । आपो॒ वात॒ः पर्व॑तासो॒ वन॒स्पति॑ः शृ॒णोतु॑ पृथि॒वी हव॑म् ॥४॥

पूरा अध्याय