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ऋग्वेद 54.3

आ नो॒ विश्वे॑ स॒जोष॑सो॒ देवा॑सो॒ गन्त॒नोप॑ नः । वस॑वो रु॒द्रा अव॑से न॒ आ ग॑मञ्छृ॒ण्वन्तु॑ म॒रुतो॒ हव॑म् ॥३॥

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