ग्रंथऋग्वेदमण्डल 6सूक्त 4545.14ऋग्वेद 45.14या त॑ ऊ॒तिर॑मित्रहन्म॒क्षूज॑वस्त॒मास॑ति । तया॑ नो हिनुही॒ रथ॑म् ॥१४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय