ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 8484.7ऋग्वेद 84.7य एक॒ इद् वि॒दय॑ते॒ वसु॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ । ईशा॑नो॒ अप्र॑तिष्कुत॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय