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ऋग्वेद 84.8

क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत् ।
क॒दा न॑ः शुश्रव॒द् गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥८॥

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