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श्रीरामचरितमानस 15.4

मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।।
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे ॥4॥

पूरा अध्याय