Utshovऐप डाउनलोड करें

श्रीरामचरितमानस 15.3

महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।।
मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥3॥

पूरा अध्याय