ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 1515.11श्रीरामचरितमानस 15.11बार बार बर मागउँ हरषि देहु श्रीरंग। पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग ॥14(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय