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श्रीरामचरितमानस 109.5

तव माया बस जीव जड़ संतत फिरइ भुलान।
तेहि पर क्रोध न करिअ प्रभु कृपा सिंधु भगवान ॥108(ग)॥

पूरा अध्याय