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श्रीरामचरितमानस 109.4

जौं प्रसन्न प्रभु मो पर नाथ दीन पर नेहु।
निज पद भगति देइ प्रभु पुनि दूसर बर देहु ॥108(ख)॥

पूरा अध्याय