ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 103103.5श्रीरामचरितमानस 103.5दम दान दया नहिं जानपनी। जड़ता परबंचनताति घनी।। तनु पोषक नारि नरा सगरे। परनिंदक जे जग मो बगरे ॥5॥पिछलाअगलापूरा अध्याय